मैंने आज ब्लॉग लिखना सीखने के लिए ब्लॉग लिखा है । लिखना सीख रहा हूँ - - - - । हँसी आई ! ठीक ही है । अगर पचपन का आदमी बचपने की बात करे तो बात तो हसने की ही है । अगर कोई मुझे लिखना सिखा दे तो मैं उसका जीवन भर आभारी रहूँगा । बशर्ते इसी जीवन में मुझे लिखना पूरी तरह आ जाए । मैं अगर लिखना सीख गया तो मैं किसी एक और को तो लिखना अवश्य सिखा दूंगा । कितना सरल गणित है । यदि सभी लिखने वाले लोग सिर्फ़ एक अनपढ़ को लिखना सिखादें । अगले दिन हम दुगने हो जायेंगे । और अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकेंगे ।
Thursday, January 22, 2009
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